Husn ki adaalat
हुस्न की अदालत में मुकदमा लगा
दाखिल कर दी अर्जी क्या होता फैसला
जुल्फो के साये फहरा के मुझे डसा
चलाया जालिम ने ऐसा जादू लिया फसा
बीच सड़क पर लूट लिया दिल है बड़ी कातिल
देखो गुंडागर्दी उसकी मार के दी चल
जिंदगी तुझसे इतना शिकवा तो करेंगे जरूर हम
उनके बेवफा होते ही क्यों ना निकल गया ये दम
ऊपर कोर्ट में जाएंगे जो अगर यहाँ बात ना बनी
आया हैं हक में फैसला दिल की जिद चली
शीशे का दिल या दिल शीशे का
मारी है नजर ऐसी गया में खो होस अपना
तू तो ना मिल बस बदनामी मिली
इक लौती जिंदगानी मेरी तुम पर जा रुकी
गुजरे आसुओं से भीगते रहे हम
अरमा मचल मचल के टूटते रहे दिल
तुझे भूल जाएं तेरी याद को कैसे भुला दे
आसुओं को कैसे रोके दर्द को कैसे छिपाये
दिल की कली कली आंसू बहाती है
तू तीर आजमाता जा हम जिगर आजमायेंगें
जवानी का हमको अखाड़ा खाली लगा
नैना लड़ गए तो मेरे मन की क्या खता
इक बार देख ले तो तड़प के ना निकलता ये दम
चैन से तो मरते हम कम से कम

